आखिर कब लगेगी नरसिहपुर में अवेध उत्खनन पर नकेल.. - Aaj Tak News

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आखिर कब लगेगी नरसिहपुर में अवेध उत्खनन पर नकेल..


नरसिंहपुर से अमित वर्मा व अमित दीक्षित की रिपोर्ट -

नरसिहपुर में रेत का अवैध खनन सदाबहार समस्या है। मानसून से पहले यह चरम पर रहता है क्योंकि बरसात के दौरान रेत का खनन बेहद मुश्किल हो जाता है। इसलिए मानसून से पहले ही रेत ठेकेदार साम दाम दंड भेद से ज्यादा से ज्यादा रेत निकालने का प्रयास करते हैं। ऐसा इस साल भी हुआ है। मीडिया में आई खबरों के मुताबिक, इसमें इजाफा ही हुआ है।यु तो मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री एक तरफ यह कहते हैं कि भू माफियाओं को जमीन में 10 फीट गाड़ देंगे और वही दूसरी तरफ तरफ बेखौफ होकर नरसिंहपुर कलेक्टर धनलक्ष्मी का साथ देकर मुख्यमंत्री के बातों को ठेंगा दिखा रहे हैं । और माँ नर्मदा और उनकी सहायक नदियों का सीना छलनी कर अवैध उत्खनन में सहयोग कर रहे हैं।



मशीनों द्वारा रेत का अवैध उत्खनन...

इधर यहां पर्यावरण विभाग से बिना मंजूरी लिए और खनिज विभाग की तमाम शर्तों और दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करते हुए दुधी,सीतारेवा ओर शक्कर नदी में धड़ल्ले से अवैध रेत खनन किया जा रहा है. बड़ी-बड़ी पोकलेन मशीनों से नदी की रेत को निकाला जा रहा है. साथ ही सरकार को लाखों रुपए के राजस्व की क्षति पहुंचाते हुए रॉयल्टी की चोरी भी की जा रही है. खनन भी ऐसी जगह किया जा रहा है, जहां मशीन के इस्तेमाल की अनुमति ही नहीं है।

गरीबो को महंगे दामो में खरीदनी पड़ रही रेत..

धनलक्ष्मी प्राइवेट लिमिटेड जैसा नाम वैसा काम कर रही है रॉयल्टी के नाम पर गुंडा वसूली भी हो रही है 2000 रुपए रॉयल्टी होने के कारण प्रधानमंत्री आवास हितग्राहियों पर यह प्रचंड प्रहार जैसा ही है नरसिंहपुर जिले में एक ट्रैक्टर रेत की कीमत महज 4000 से लेकर ₹4500 हो गई है ऐसी स्थिति में गरीबों को मकान बनाना महंगा पड़ रहा है, जिसको देखते हुए भी जिले के प्रमुख जिम्मेदारों ने चुप्पी साध रखी है।

निर्धारित सीमा क्षेत्र के बाहर से कर रहे अवेध उत्खनन...

गौरतलब है कि खनिज विभाग ने जिले की सभी खदानों में निर्धारित सीमांकन ओर निर्धारित रेत उत्खनन की मात्रा पहले से ही तय की हुई है पर इसके विपरीत धनलक्ष्मी कंपनी खनिज विभाग की आखों में धुल झोक कर निर्धारित सीमा के बाहर से रेत का उत्खनन करा रही है।गाडरवारा तहसील के अंतर्गत आने वाली मुआर, तूमड़ा,साईंखेड़ा,संसारखेड़ा, ढिगसरा ओर अजंदा रेत खदानों में कई महीनों से निर्धारित सीमा क्षेत्र के बाहर से कंपनी द्वारा उत्खनन किया जा रहा है शासन-प्रशासन प्रशासन है की अपनी आँखें बंद किए हुए है।

ओवरलोडिड डंफरो पर नही होती कोई कार्यवाही...

जिले की सड़कों पर दिन और रात के समय डंपर चालक तेज रफ्तार के साथ वाहनों में ओवर लोड रेत भरकर अवैध रूप से परिवहन कर रहे हैं, जिससे जहां हादसों की आशंका बनी हुई है तो वहीं शासन को भी राजस्व का नुकसान हो रहा है।धनलक्ष्मी कंपनी के बुलंद हौसलों के सामने प्रशासनिक अफसर व खनिज विभाग के अधिकारी बौने साबित हो रहे है।नरसिहपुर जिले से प्रति दिन सैकड़ों की संख्या मे रेत से भरे डंपर निकलते है। इन डंपरों में ओवरलोड रेत भरी होने के कारण सड़कें भी क्षतिग्रस्त हो रही हैं।ओवरलोड रेत से भरे डंपर पुलिस थाना, एसडीएम व तहसीलदार कार्यालय के समाने से बेखौफ होकर प्रति दिन निकलते है, लेकिन ओवर लोड रेत से भरे इन डंपरों पर प्रशासनिक अफसरों के द्वारा कार्रवाई नहीं की जाती है। हालांकि कभी कभार दिखावे के लिए रेत से भरे डंपरों की चैकिंग के नाम पर रोका जाता है। बगैर कार्रवाई के चलता कर दिया जाता है। वहीं खनिज अधिकारी भी कार्रवाई करने से परहेज़ करते हैं। जो समझ से परे है।

प्रदेश सरकार के मंत्री ओर जनप्रतिनिधियों ने भी धनलक्ष्मी के खिलाफ आवाज उठाई..

हाल ही में प्रदेश के कृषि मंत्री कमल पटेल ने भी उक्त अवैध उत्खनन को लेकर नरसिंहपुर कलेक्टर और जबलपुर कमिश्नर को दिशा-निर्देश देने को लेकर ट्वीट किया था। लेकिन अब तक अवैध उत्खनन करने वाली उक्त कंपनी पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है, ना ही इन घाटों पर प्रशासन अवैध उत्खनन रोकने में सफल हो पाया है। वहीं जानकारी के मुताबिक विभिन्न सामाजिक सगठनों ने नर्मदा नदी में हो रहे इस अवैध उत्खनन को लेकर धनलक्ष्मी कम्पनी ओर खनिज विभाग के खिलाफ आवाज भी उठाई है। वहीं मां नर्मदा के अवैध उत्खनन को रोकने के लिए कांग्रेस नेता और होशंगाबाद संसदीय क्षेत्र से प्रत्याशी रहे देवेंद्र पटेल भी अपनी आवाज बुलंद कर रहे है। वह पैदल यात्रा निकाल चुके हैं और साथ ही नर्मदा नदी में हो रहे अवैध उत्खनन को लेकर वह कई बार सामने आ चुके हैं।



अब देखना होगा कि बगैर शासकीय अनुमति के अवैध रुप से मां नर्मदा के विभिन्न घाटों को छलनी कर रेत उगाही करने वाली उक्त कंपनी के अवैध उत्खनन और परिवहन को रोकने के लिए शासन-प्रशासन कब कमर कसता है।