शिवराज सिंह चौहान बताएं फील्ड में कौन होता है कवरेज कौन देता है क्या अधिमान्य पत्रकार फील्ड में होते हैं - Aaj Tak News

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शिवराज सिंह चौहान बताएं फील्ड में कौन होता है कवरेज कौन देता है क्या अधिमान्य पत्रकार फील्ड में होते हैं



जबलपुर से संतोष जैन की रिपोर्ट -


अधिमान्य और गैर अधिमान्य पत्रकार...
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्रकारों का कितना ख्याल
वाह रे मध्य प्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह चौहान क्या कहने आपके
शिवराज सिंह चौहान बताएं फील्ड में कौन होता है कवरेज कौन देता है क्या अधिमान्य पत्रकार फील्ड में होते हैं

यह वैसे ही घोषणा है जिससे साँप भी मर जाये और लाठी भी न टूटे। सवाल यह है कि मध्यप्रदेश में ऐसे कितने अधिमान्य पत्रकार हैं जो सतत फील्ड पर रहकर पहली पंक्ति में कार्य करते हैं तो शायद जबाव होगा क्या पता..? आपको जानकर हैरानी होगी कि अधिकांश अधिमान्य पत्रकार अपने एसी दफ्तरों से बाहर नहीं निकलते न ही सड़कों या खुली जगहों पर दौड़ भागकर खबर का संकलन या प्रसारण करते हैं। हाँ इसके बीच कुछ मुठ्ठी भर पत्रकार हैं जो जान पर खेलकर खबरें पाठकों या दर्शकों तक पहुंचाते हैं उनमें अधिमान्य या गैर अधिमान्य दोनों शामिल होते हैं। सबसे ज्यादा फजीहत रिपोर्टर, संवाददाता और कैमरामैन की होती है जिन्हें घण्टों अपनी सुरक्षा की परवाह किये बिना मालिक का हुक्म बजा लाना पड़ता है। यह हुक्म बजाने वाले गैर अधिमान्य और दफ्तर में बैठकर हुक्म देने वाले अधिमान्य पत्रकार होते हैं। ऐसे हालात में जिन्हें आपदा या महामारी के बीच काम ही नहीं करना उनके लिए मुख्यमंत्री की यह घोषणा समय के साथ अवसर तलाशती ज्यादा दिखाई पड़ रही है। प्रदेश में हजारों पत्रकार ऐसे भी हैं जो रोज कव्हरेज के दौरान बीमार हो रहे हैं, उन्हें इलाज नहीं मिल रहा और वह असमय मौत की आगोश में समा रहे हैं जिनका कहीं कोई जिक्र नहीं है। चर्चा सिर्फ अधिमान्य पत्रकारों की हो रही है, सारी सुविधाएं तो सुविधाभोगी पत्रकारों को ही मिल रही हैं तो ऐसे में

गैर अधिमान्य पत्रकार कहाँ जायें यह सवाल पूछने में संकोच और शर्म तो आती ही है क्योंकि अधिमान्यता कैसे और किस तरह हासिल होती है यह गैर अधिमान्य से ज्यादा कौन जान सकता है। कुल मिलाकर पूंजीपतियों मालिकों द्वारा अपने वास्तविक बंधुआ मजदूर पत्रकारों का हक अप्रत्यक्ष रूपसे यहां भी मारा जा रहा है बस इस बार काँधा किसी और का है। अंततः मारे पत्रकार ही जायेंगे, कुछ रेशमी लिबास में जाएंगे कुछ सादे कफ़न में जाएंगे। इससे अच्छा तो यह होता कि अधिमान्य पत्रकारों को जो मदद सरकार देना चाहती है वह मदद प्रदेश के नागरिकों की स्वास्थ्य सुविधाओं, ऑक्सीजन, दवाओं और कोरोना मरीजों को दे, ताकि प्रदेश खुशहाल सुरक्षित स्वस्थ रह सके।