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कोरोना संक्रमण में मेडिकल कॉलेज का नहीं मिला कोई फायदा

संतोष जैन की रिपोट -

कोरोना संक्रमण में मेडिकल कॉलेज का नहीं मिला कोई फायदा

- मेडिकल कॉलेज के अधिकतर डाक्टर निजी प्रैक्टिस में लगे

- कॉलेज से संबद्ध जिला अस्पताल में नहीं मिल रही स्वास्थ्य सुविधाएं

शिवपुरी -

शिवपुरी में बढ़ते कोरोना संक्रमण के बीच दो सौ करोड़ रुपए के बजट से खोला गया मेडिकल कॉलेज किसी काम नहीं आ रहा है। लोगों को उम्मीद थी कि नया मेडिकल कॉलेज खुलेगा तो स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार होगा और बेहतर सुविधाएं मिलेंगी लेकिन कोरोना संक्रमण काल में यह उम्मीदें धरी की धरी रह गई। इस समय कोरोना काल है और कई लोग इस महामारी की चपेट में आ रहे हैं ऐसे में लोगों को अच्छी स्वास्थ्य सुविधाओं की दरकार है लेकिन मेडिकल कॉलेज खुलने के दो साल बाद में यह उम्मीद पूरी नहीं हुई। मेडिकल कॉलेज कॉलेज के अधिकतर डॉक्टर और प्रोफेसर शिवपुरी में बड़े पैमाने में निजी प्रैक्टिस कर रहे हैं। शिवपुरी का जिला अस्पताल मेडिकल कॉलेज से संबंद्ध अस्पताल है यहां पर क्रमबद्ध तरीके से कॉलेज के डॉक्टर और सीनियर प्रोफेसरों को ओपीडी में आना और यहां पर मरीजों का इलाज करना है लेकिन यहां पर ऐसा नहीं हो रहा है। अधिकांश डॉक्टर निजी प्रैक्टिस कर रहे हैं या बड़े-बड़े जो प्राइवेट अस्पताल अभी हाल ही में खुले हैं उनमें अपनी सेवाएं नियमविरूद्ध तरीके से दे रहे हैं।

निजी प्रैक्टिस के नाम पर खुली दुकानें-

शहर में नाई की बगिया, जिला अस्पताल रोड, पोहरी रोड, नए बस स्टैंड के पास, महाराणा प्रताप कॉलोनी के पास, झांसी तिराहा, विष्णु मंदिर के सामने वाली रोड, कमलागंज, फिजिकल रोड, माधव चौक, कमलागंज आदि स्थानों पर यहां पर मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों व प्रोफेसरों ने कई माफियाओं से टाईअप करते हुए अपनी दुकाने व निजी क्लीनिक खोल लिए हैं। खुलेआम यहां पर 300 से 500 रुपए लेकर ओपीडी चला रहे हैं। आनन-फानन में बड़े निजी अस्पताल खुल गए। इसके अलावा खुलेआम निजी चिकित्सालयों में ऑपरेशन कर हजारों रुपए लोगों से यह डॉक्टर ले रहे हैं। इस पर जिला प्रशासन व मेडिकल कॉलेज प्रबंधन कोई रोक नहीं लगा पा रहा है।




बड़े-बड़े सपने दिखाए थे नेताओं -

दो साल पहले जब यह मेडिकल कॉलेज खुला तो नेताओं ने बड़े-बड़े सपने दिखाए कि अब लोकल लेवल पर लोगों को बेहतर इलाज मिलेगा। शिवपुरी से लोगों को ग्वालियर या दिल्ली रैफर नहीं किया जाएगा। लेकिन आज भी स्थिति वहीं जो दो साल पहले थी। अब तो बाहर के जो डॉक्टर शिवपुरी मेडिकल कॉलेज में पदस्थ हुए हैं उन्होंने अपनी दुकाने यहां पर खोल ली और धंधा शुरू कर दिया। निजी प्रैक्टिस जारी है। कोरोना काल में रोज लोग मर रहे हैं। मेडिकल कॉलेज प्रबंधन और जिला अस्पताल के अफसरों में आपस में कोई तालमेल नहीं। जिला अस्पताल में आज भी भटकते और परेशान मरीज भी देखे जा सकते हैं।