उखरी रोड स्थित गैलेक्सी हॉस्पिटल में ऑक्सीजन की कमी से 5 मरीजों की चली गई जान - Aaj Tak News

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उखरी रोड स्थित गैलेक्सी हॉस्पिटल में ऑक्सीजन की कमी से 5 मरीजों की चली गई जान



जबलपुर से गजेंद्र सिंह व शारदा चक्रवर्ती की रिपोर्ट - 

गैलेक्सी हॉस्पिटल के डॉक्टर एवं स्टाफ अस्पताल से भागे।

निजी अस्पतालों में होने वाली मौतों के लिए उनकी लापरवाही जिम्मेदार है। जिस बीमारी का कोई इलाज नहीं है। उसका इलाज किया जा रहा है।

कोरोना पॉजिटिव मरीजो से दो से चार लाख के पैकेज में मरीजों को भर्ती किया जाता है।और ऑक्सीजन सिलेंडर का 5 से 7 हजार रुपए घंटा चार्ज किया जाता है ।वेंटिलेटर आसमान छू रहा है। इतनी रकम लूटने के बाद भी ,मरीज तड़प तड़प कर दम तोड़ रहे हैं ।

सरकार और जिला प्रशासन को अपनी आंखों पर बंधी पट्टी को उतार फेंकना चाहिए। और निजी अस्पतालों के प्रति अपने प्रेम को तिलांजलि दे देनी चाहिए । भैया कमीशन बाजी तो जीवन भर चलती रहेगी, अभी जिन लोगों की जान निजी अस्पताल ले रहे हैं। उस उस पर लगाम कसने की कृपा करो।और जितने भी लोगों की मौत निजी अस्पतालों में हुई है उनके परिवारों को निजी अस्पताल प्रबंधकों से मुआवजा दिलाने कठोर कदम उठाने चाहिए। तभी निजी अस्पतालों की मनमानी और लूट का खसोट पर अंकुश लगाने की उम्मीद कर सकते हैं। और गैलेक्सी अस्पताल प्रबंधन पर हत्या का संगीन मामला दर्ज किया जाना चाहिए। लेकिन होगा कुछ भी नहीं महज दिखावे की खानापूर्ति की जाएगी ।क्योंकि निजी अस्पतालों का जो संगठन है। वह चुनाव के वक्त सत्ता और विपक्ष दोनों ही पार्टियों को मोटी रकम चंदे में देता है। इस संगठन द्वारा सत्तारूढ़ दल को भी मोटा चंदा दिया जाता है। और समय-समय पर प्रशासन को भी उपकृत किया जाता है । और सबसे बड़ी बात कुछ जनप्रतिनिधि और बड़े नेता निजी चिकित्सालयों के संचालक हो गए है और चिकित्सा का व्यापार कर रहे हैं। इन सब लोगों के होते हुए ,निजी चिकित्सालय को मरीजों की हत्या करने का लाइसेंस मिल चुका है। इसीलिए यह बेखौफ है हम प्रतिदिन खबर बना रहे हैं, रोज किसी निजी चिकित्सालय में लापरवाही की वजह से मरीज की मौत की खबर बनाई जा रही है। परिजन रोते बिलखते हैं, हंगामा करते हैं ,लेकर ना तो प्रशासन का कलेजा पसीजता है ,और ना जनप्रतिनिधियों का