राष्ट्रपति कोविन्द ने जबलपुर में कहा, सभी हाईकोर्ट अपने निर्णयों का स्थानीय भाषा में अनुवाद करवाएं - Aaj Tak News

Breaking

आज तक 24x7 वेब न्यूज़ व्यूअर से अनुरोध करता है कि आप अपने सुझाव हम तक जरूर भेजें.. ताकि आने वाले समय मे हम आपकी मदद से और भी बेहतर कार्य कर सकें... साथ ही यदि आपको लेख अच्छा लगे तो इसे ओरों तक भी पहुंचाए.. प्रकाशन हेतु ख़बरें, विज्ञप्ति मोबाइल- 9406763885 पर व्हाट्सएप्प करें.....प्रदेश, संभाग, जिला, तहसील और ग्राम स्तर पर संवाददाता की आवश्यकता है

राष्ट्रपति कोविन्द ने जबलपुर में कहा, सभी हाईकोर्ट अपने निर्णयों का स्थानीय भाषा में अनुवाद करवाएं


संतोष जैन जबलपुरराष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने जबलपुर में ऑल इंडिया ज्यूडिशियल एकेडमीज डायरेक्टर्स रिट्रीट का दीप प्रज्जवलित कर उद्घाटन किया. राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में न्यायपालिका से जुड़ी दो महत्वपूर्ण बातों पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट अपने निर्णयों को नौ भाषाओं में अनुवाद करवा रही है. मैं चाहता हूं कि सभी उच्च न्यायालय अपने प्रदेश की अधिकृत भाषा में निर्णयों का अनुवाद कराएं. इसके साथ ही राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि लंबित मामलों के लिए केवल अदालतें जिम्मेदार नहीं है, इसके लिए वादी और प्रतिवादी द्वारा बार-बार स्थगन लेकर केस को लंबा खींचना भी एक कारण है. इन कमियों के निराकरण के लिए न्यायपालिका को सजग रहने की आवश्यक्ता है.

राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने कार्यक्रम में संबोधित करते हुए कहा कि देश में 18,000 से ज्यादा न्यायालयों का कंप्यूटरीकरण हो चुका है. लाकडाउन की अवधि में, जनवरी, 2021 तक पूरे देश में लगभग छिहत्तर लाख मामलों की सुनवाई वर्चुअल कोर्ट्स में की गई. हमारी लोअर ज्यूडिशरी, देश की न्यायिक व्यवस्था का आधारभूत अंग है. उसमें प्रवेश से पहले, सैद्धांतिक ज्ञान रखने वाले कानून के विद्यार्थी को कुशल एवं उत्कृष्ट न्यायाधीश के रूप में प्रशिक्षित करने का महत्वपूर्ण कार्य हमारी न्यायिक अकादमियां कर रही हैं. अब जरूरत है कि देश की अदालतों, विशेष रूप से जिला अदालतों में लंबित मुकदमों को शीघ्रता से निपटाने के लिए न्यायाधीशों के साथ ही अन्य न्यायिक एवं अर्ध न्यायिक अधिकारियों के प्रशिक्षण का दायरा बढ़ाया जाए.

राष्ट्रपति ने कहा कि बृहस्पति-स्मृति में कहा गया है, केवलम् शास्त्रम् आश्रित्य न कर्तव्यो विनिर्णय युक्ति-हीने विचारे तु धर्म-हानि: प्रजाय ते. अर्थात् केवल कानून की किताबों व पोथियों मात्र के अध्ययन के आधार पर निर्णय देना उचित नहीं होता. इसके लिए युक्ति का - विवेक का सहारा लिया जाना चाहिए. न्याय के आसन पर बैठने वाले व्यक्ति में समय के अनुसार परिवर्तन को स्वीकार करने, परस्पर विरोधी विचारों या सिद्धांतों में संतुलन स्थापित करने और मानवीय मूल्यों की रक्षा करने की समावेशी भावना होनी चाहिए. न्यायाधीश को किसी भी व्यक्ति, संस्था और विचार-धारा के प्रति, किसी भी प्रकार के पूर्वाग्रह तथा पूर्व-संचित धारणाओं से सर्वथा मुक्त होना चाहिए. न्याय करने वाले व्यक्ति का निजी आचरण भी मर्यादित, संयमित, सन्देह से परे और न्याय की प्रतिष्ठा बढ़ाने वाला होना चाहिए.

सीएम ने कहा, न्याय जल्दी कैसे मिले, इस पर विचार करना जरूरी है

इस कार्यक्रम में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, सीएम शिवराज सिंह चौहान, सीजेआई सहित देशभर से आए न्यायाधीश शामिल हुए.कार्यक्रम में सीएम शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि भारत की जनता को यह विश्वास है कि न्यायपालिका में उन्हें न्याय मिलेगा. लंदन में नीरव मोदी ने कहा कि उसे न्याय चाहिए तो लंदन की अदालत ने कहा कि उसे भारत की न्यायपालिका में भी न्याय मिलेगा, यह पूरी दुनिया जानति. हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट सहित सभी अदालतों में हजारों केस पेडिंग है. कोरोना काल में 3 लाख केस और पेडिंग हो गए हैं. न्याय जल्दी कैसे मिले, इस पर विचार करना जरूरी है. सीएम ने कहा कि यहां जो चिंतन हम करेंगे उसका निष्कर्ष निकलेगा. जो भी निष्कर्ष निकलेंगे मध्य प्रदेश सरकार उसे पूरा करने लाने के लिए हाईकोर्ट के साथ मिलकर काम करेगी.

समय के साथ विकसित होते कानून को समझाना जरूरी

सीजेआइ न्?यायमूर्ति शरद अरविंद बोबडे ने कहा कि न्याय एक अनोखी प्रक्रिया है. समय के साथ विकसित होते कानून को समझाना जरूरी है. न्याय प्रशिक्षण के तौर तरीकों को बदलता होगा. उन्होंने कहा कि अनुभव से उत्कृष्टता आती है. सभी अकादमियों को न्यायाधीशों के सर्वोगीण विकास की ओर ध्यान देने की जरूरत है. इसके अलावा मानसिक आरोग्य पर ध्यान देना भी जरूरी है.