कृष्ण-सुदामा मिलन की कथा ने किया भाव-विभोर - Aaj Tak News

Breaking

आज तक 24x7 वेब न्यूज़ व्यूअर से अनुरोध करता है कि आप अपने सुझाव हम तक जरूर भेजें.. ताकि आने वाले समय मे हम आपकी मदद से और भी बेहतर कार्य कर सकें... साथ ही यदि आपको लेख अच्छा लगे तो इसे ओरों तक भी पहुंचाए.. प्रकाशन हेतु ख़बरें, विज्ञप्ति मोबाइल- 9406763885 पर व्हाट्सएप्प करें.....प्रदेश, संभाग, जिला, तहसील और ग्राम स्तर पर संवाददाता की आवश्यकता है

कृष्ण-सुदामा मिलन की कथा ने किया भाव-विभोर

संवाददाता निवास से देवेन्द्र चौधरी - रसलगंज यज्ञशाला निवास  में चल रही श्रीमद्भागवत पुराण में आचार्य श्री ध्रुव जी महाराज के द्वारा आज सुदामा चरित्र पर कथा का प्रसंग बताया गया सुदामा से परमात्मा ने मित्रता का धर्म निभाया। राजा के मित्र राजा होते हैं रंक नहीं, पर परमात्मा ने कहा कि मेरे भक्त जिसके पास प्रेम धन है वह निर्धन नहीं हो सकता। कृष्ण और सुदामा दो मित्र का मिलन ही नहीं जीव व ईश्वर तथा भक्त और भगवान का मिलन था। जिसे देखने वाले अचंभित रह गए थे। आज मनुष्य को ऐसा ही आदर्श प्रस्तुत करना चाहिए।उन्होंने आगे कहा कि कृष्ण और सुदामा जैसी मित्रता आज कहां है। यही कारण है कि आज भी सच्ची मित्रता के लिए कृष्ण-सुदामा की मित्रता का उदाहरण दिया जाता है। द्वारपाल के मुख से पूछत दीनदयाल के धाम, बतावत आपन नाम सुदामा, सुनते ही द्वारिकाधीश नंगे पांव मित्र की अगवानी करने पहुंच गए। लोग समझ नहीं पाए कि आखिर सुदामा में क्या खासियत है कि भगवान खुद ही उनके स्वागत में दौड़ पड़े। श्रीकृष्ण ने स्वयं सिंहासन पर बैठाकर सुदामा के पांव पखारे। कृष्ण-सुदामा चरित्र प्रसंग पर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।


उन्होंने आगे कहा कि श्रद्धा के बिना भक्ति नहीं होती तथा विशुद्ध हृदय में ही भागवत टिकती है। भगवान के चरित्रों का स्मरण, श्रवण करके उनके गुण, यश का कीर्तन, अर्चन, प्रणाम करना, अपने को भगवान का दास समझना, उनको सखा मानना तथा भगवान के चरणों में सर्वश्व समर्पण करके अपने अन्त:करण में प्रेमपूर्वक अनुसंधान करना ही भक्ति है। श्रीकृष्ण को सत्य के नाम से पुकारा गया। जहां सत्य हो वहीं भगवान का जन्म होता है। भगवान के गुणगान श्रवण करने से तृष्णा समाप्त हो जाती है। परमात्मा जिज्ञासा का विषय है, परीक्षा का नहीं । आचार्य गजेंद्र पांडे ने बताया कि आज सुबह से हवन पूर्णाहुति के पश्चात कन्या पूजन भंडारा का आयोजन किया जाएगा ।  रसलगंज यज्ञशाला समिति के द्वारा निवेदन किया गया, कि अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर भंडारा में सम्मिलित होकर पुण्य लाभ अर्जित करें ।