काला कानून जांच एजेंसियों के हाथ बांधे सरकार ने बदले नियम अब जांच से पहले लोकायुक्त और e o. s w. जैसी एजेंसियों को लेनी होगी अनुमति अब रिश्वत देने वालों पर भी दर्ज होगी एफआईआर हाईकोर्ट का सख्त रुख डीजीपी को दिए निर्देश - Aaj Tak News

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काला कानून जांच एजेंसियों के हाथ बांधे सरकार ने बदले नियम अब जांच से पहले लोकायुक्त और e o. s w. जैसी एजेंसियों को लेनी होगी अनुमति अब रिश्वत देने वालों पर भी दर्ज होगी एफआईआर हाईकोर्ट का सख्त रुख डीजीपी को दिए निर्देश


 भोपाल से (संतोष जैन) -  भ्रष्टाचारी और माफियाओं के खिलाफ अभियान चला रही सरकार ने अब बेस्ट आचार की जांच एजेंसियों के हाथ बांध दिए हैं नए नियमों में सरकारी अफसर कर्मचारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार की जांच से पहले लोकायुक्त और ई ओ डब्ल्यू जैसी एजेंसियों को सरकार से अनुमति लेनी होगी अब सीधे तौर पर भस्ट के  खिलाफ जांच नहीं कर सकते यह एक तरह का काला कानून है कि घोटालों के मामले दबे में ही रहेंगे सामान्य प्रशासन विभाग ने एक आदेश जारी कर कहा है कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 17a के अनुसार किसी लोक सेवक द्वारा सरकारी कामकाज में अपराधों की जांच या पूछताछ के पहले सरकार की अनुमति लेनी होगी जांचकर्ता सीधे कार्रवाई नहीं कर सकते 

सभी विभाग प्रमुखों को भेजे गए निर्देश में सरकार ने अनुमति देने की प्रक्रिया भी निर्धारित की है 

अब एजेंसी को संबंधित विभाग को वह रिकॉर्ड दिखाना होगा जिसके आधार पर वह भ्रष्टाचार या अन्य गड़बड़ियों की जांच करना चाहती है इन्हें भेजी सूचना सामान्य प्रशासन विभाग ने सभी विभागों के प्रमुख सचिव और विभागाध्यक्ष को भेजि आदेश की कॉपी लोकायुक्त और ओइडब्लू सहित अन्य संबंधित को भेजी है

 अफसरों के हाथ कमान

 नए आदेश के बाद अब भ्रष्टाचार के मामले की जांच सरकारी अफसरों की हाथ होगी यानी धारा 17 के तहत अब अधिकारी पद पर रहते हुए जो निर्णय करेंगे वही मान्य होगा ऐसा इसलिए क्योंकि उनके खिलाफ जांच से पहले सरकार की इजाजत लेनी होगी

 विभाग की राय पर होगी जांच

 लोकायुक्त हर साल औसत छे हजार से ज्यादा मामले

ं लोकायुक्त में हर साल जांच के लिए औसत 6000 शिकायतें आती हैं जांच के बाद शिकायतें दर्ज की जाती हैं लोगों में जागरूकता बढ़ने के साथ शिकायतों में इजाफा हुआ है 


ईओडब्ल्यू 4000 केस लंबित 


इनकी जांच के लिए सिर्फ 40 अफसर 



होने चाहिए 500 से ज्यादा जांच अफसर 


ईओ डब्ल्यू के पास करीब 4000 जांच लंबित है जबकि इनकी जांच के लिए डीएसपी और निरीक्षक स्तर के 40 अफसर ही हैं ऐसे में एक अधिकारी के करीब 100 जांचें आती है आर्थिक अपराधों की संख्या को देखते हुए ईओडब्लू में डीएसपी व निरीक्षक होने चाहिए क्योंकि अपराध की शिकायतों और जांच का जिम्मा इन्हीं पर होता है


 अब  रिश्वत देने वालों पर भी दर्ज होगी एफआईआर


 हाईकोर्ट का सख्त रुख डीजीपी को दिए निर्देश काम करवाने के लिए रिश्वत देने वालों की अब खैर नहीं हाईकोर्ट ने अब रिश्वत देने वालों पर भी केस दर्ज करने के निर्देश दिए हैं जस्टिस अतुल श्रीधरण की सिंगल बेंच ने अग्रिम जमानत की एक मामले की सुनवाई के बाद डीजीपी को निर्देश दिए कि वे इस संबंध में हर जिले के एसपी और टीआई को सूचित करें दरअसल गाजीपुर यूपी निवासी बिल्डर सूरजमल उसकी कंपनी में कार्यरत सिंगरौली निवासी ड्राइवर बुद्धसेन और एचआर मैनेजर संतोष पनिका की ओर से जमानत के लिए अदालत में अर्जी दी गई एक व्यक्ति का आरोप है कि रेप केस में जेल में बंद उसके बेटे को जमानत रिहा करवाने के नाम पर बिल्डर और उसके सहयोगी होने उस ₹8लाख50हजार हड़प लिए इसी लिखित शिकायतकर्ता ने तीनों पर विंध्यनगर में केस दर्ज करवाया है वहीं आरोपियों की ओर से अधिवक्ता मनीष दत्त ने बताया आवेदक सूरजमल को सिंगरौली में एनसीएल का ठेका दिलाने के लिए शिकायतकर्ता ने सात लाख लिए थे वापस मांगने पर झूठी रिपोर्ट दर्ज करवा दी उन्होंने तर्क दिया कि शिकायतकर्ता ने भी रिश्वत देने का अपराध किया उस पर प्रकरण क्यों नहीं दर्ज किया कोर्ट ने निर्देश दिए कि शिकायतकर्ता पर भी कार्रवाई हो 


हिम्मत कैसे हुई रिश्वत देने की कोर्ट ने कहा 


रिश्वत देकर अवैधानिक काम करवाने की मंशा रखने वाले बेईमान रकम वसूली का रोना रोते हुए न्यायिक प्रक्रिया के समक्ष पहुंचने की हिम्मत कैसे करते हैं