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नीरज श्रीवास्तव जिला ब्यूरो उमरिया की खास रिपोर्ट कहां चले गए T42 सोलो बाघिन के तीन और शावक...? क्या कर रहा है प्रबंधन, *वन्यप्रेमीयों के मन मे उठ रहे सवाल बाघों की धरती कही जाने वाली विश्व विख्यात बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व जो की बाघों को लेकर मध्य भारत में सबसे अधिक संख्या का दर्जा प्राप्त करने वाला टाइगर रिजर्व अब बाघ विहीन के पथ पर अग्रसर है और इसका प्रमुख कारण है प्रबंधन की लचर कार्यप्रणाली और व्यवस्था।उपरोक्त मामला जब प्रकाश में आया कि बांधवगढ़ पार्क के अंदर बाघों का दीदार अब सैलानियों के लिए दुर्लभ हो गया है जिसे लेकर वन्यप्रेमियों और पर्यटक अब पूछ रहे है की बाघिन T42 व उसके।एक शावक के मृत्यु के बाद और अन्य 3 शावक कहां गायब हो गए जिसे लेकर लोगों को तरह तरह के भ्रम सता रहे हैं और प्रबंधन जवाब देने की बजाय लीपापोती में जुटा है। बाघिन व शावक की शिकार की आशंका कई ऐसे संदिग्ध व्यक्तियों से मिला है प्रबंधन आखिर कौन है यह व्यक्ति विश्व विख्यात पर्यटक स्थल बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व हो या भारत के चाहे जितने भी टाइगर रिजर्व हो उपरोक्त टाइगर रिजर्व में कोर क्षेत्र के लिए ऐसे कड़े से कड़े कानून बनाए गए हैं जिनमें परिंदा भी पग नहीं मार सकता किंतु वर्तमान प्रबंधन के मुखिया के कुछ ऐसे कृत्य हैं जिन्हें देखकर नकारा नहीं जा सकता। सूत्रों की माने तो प्रबंधन ऐसे व्यक्तियों से संबंध रखते हैं जिनके सगे संबंधियों पर वन्य प्राणी के शिकार का मुकदमा भी कुछ वर्ष पहले कायम हुआ था क्षेत्र संचालक के  ऑफिस में तो देखे ही गए उपरोक्त व्यक्तियों को क्षेत्र संचालक के शासकीय वाहन में भी साथ में बैठे हुए देखा गया है जिन पर जनता अपने अपने प्रश्न चिन्ह लगा रही है कि उपरोक्त व्यक्तियों में से कहीं कोई ऐसे व्यक्ति का हाथ तो नहीं जो प्रबंधन के समस्त रणनीति को जानता हो और प्रबंधन द्वारा बनाये जा रहे रणनीति की जानकारी पाकर उसका फायदा उठा लेता हो अभी हाल में सोलो (T42) बाघिन व शावक  की संदिग्ध परिस्थितियों में हुए मौत के संबंध में जनता का कहना है कि जहां पर प्रबंधन के 8 हाथियों द्वारा 24 घंटे निगरानी की जा रही थी उपरोक्त दौरान कैसे दो बाघों का रहस्यमय तरीके से मौत हो सकती कहीं ना कहीं प्रबंधन  मुखिया के साथ घूम रहे ऐसे निजी लोगों का कृत्य तो नहीं जिसमें प्रबंधन भी अपना सहयोग निभा रहा हो नहीं तो कोई भी  आम व्यक्ति पार्क के अंदर बगैर अनुज्ञा पत्र अथवा वन विभाग से अनुमति लिए कोर क्षेत्र में प्रवेश नहीं कर सकता लेकिन ऐसा क्या है उपरोक्त व्यक्ति में जिस को प्रबंधन की मुखिया स्वयं अपने शासकीय वाहन में घुमा रहे हैं. जानकरी अनुसार उक्त व्यक्ति न कोई शासकीय कर्मचारी है और न ही बाघ एनजीओ और बाघ बचाने वाले संस्था का सदस्य फिर भी।आखिर कौन है यह व्यक्ति  क्या राज्य शासन अथवा राष्ट्रीय बाघ प्राधिकरण विभाग उपरोक्त व्यक्ति के बारे में संज्ञान लेगा..? जांच करें एनटीसीए अभी हाल में ही पन्ना टाइगर रिजर्व में हुए संदिग्ध परिस्थितियों में टाइगरो के मौत के संबंध में राष्ट्रीय बाघ प्राधिकरण की टीम खुद जांच कर रही है, जिसे लेकर वन्यप्रेमियों और जानकारों का कहना है कि बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में उपरोक्त मामलों की जांच एनटीसीए के टीम अथवा सीबीआई से क्यों नहीं कराई जा सकती अतः उनकी मांग है जांच इन्हीं विभाग से होनी चाहिए.