COVID-19 / कोरोना वायरस के रूप बदलने की रफ्तार हुई धीमी, और ज्यादा बढ़ा संक्रमण का खतरा- स्टडी - Aaj Tak News

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COVID-19 / कोरोना वायरस के रूप बदलने की रफ्तार हुई धीमी, और ज्यादा बढ़ा संक्रमण का खतरा- स्टडी

नई दिल्ली। चीन से फैला कोरोना वायरस (Coronavirus) भारत समेत दुनिया के तमाम देशों में तबाही मचा रहा है। इस वायरस के रूप बदलने (म्यूटेट) की दर धीमी हो गई है। अब तक कोरोना के 24 रूप (स्ट्रेंन) सामने आ चुके हैं। दुनिया के कई विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इस समय वैक्सीन तैयार हो गई, तो इसका एक डोज कई सालों तक इंसानों को संक्रमण से बचाएगा। हालांकि, इस बीच अमेरिका की स्क्रिप्स रिचर्स इंस्टीट्यूट (Scripps Research Institute) की एक नई स्टडी में इसके उलट बात कही गई है। रिसर्च के मुताबिक, कोरोना वायरस के रूप बदलने की दर धीमी जरूर हुई है, लेकिन ये और ज्यादा खतरनाक हो गया है।
अमेरिका के फ्लोरिडा स्थित स्क्रिप्स रिचर्स इंस्टीट्यूट की ये स्टडी शुक्रवार को पब्लिश हुई थी। इसमें कहा गया है कि संयुक्त राज्य अमेरिका और यूरोप में होने वाले कोविड-19 का संक्रमण पहले से और ज्यादा खतरनाक, कार्यात्मक और सेल-बाइंडिंग स्पाइक्स वाले हो गए हैं। म्यूटेशन कम जरूर हुआ है, लेकिन खतरा बढ़ गया है।'
स्टडी के मुताबिक, लैब टेस्टिंग में पता चला कि पूरे यूरोप और अमेरिका में SARS कोरोना वायरस के 2 वैरिएंट में एक छोटा आनुवंशिक उत्परिवर्तन हुआ है, जो कोशिकाओं को संक्रमित करने की वायरस की क्षमता को काफी बढ़ाता है। स्क्रिप्स रिचर्स इंस्टीट्यूट के सीनियर रिसर्चर और वायरोलॉजिस्ट हैरियन को (Hyeryun Choe) बताते हैं, 'म्यूटेशन के साथ कोरोना वायरस और ज्यादा जानलेवा हो जाता है। वहीं, बिना म्यूटेशन वाले वायरस उतने खतरनाक नहीं होते।'
इस बात पर काफी बहस होती हा कि कोविड-19 महामारी ने दुनिया के कुछ हिस्सों में स्वास्थ्य प्रणालियों को जल्दी से क्यों प्रभावित किया, जबकि अन्य स्थानों पर प्रकोप को आसानी से नियंत्रित किया गया है। स्टडी के मुताबिक, इसका कारण म्यूटेशन ही है, जिसकी अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग दर है।
स्टडी में बताया गया है कि कैसे सभी वायरस परस्पर परिवर्तित होते हैं और कुछ हद तक बदलते हैं, लेकिन वे परिवर्तन शायद ही कभी फिटनेस या प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता को प्रभावित करते हैं। SARS-CoV-2 वैरिएंट के संबंध में महत्वपूर्ण परिवर्तन D614G म्यूटेशन की उपस्थिति थी, जो क्षेत्रीय महामारी में आमतौर पर नहीं पाया जाता।
हालांकि, विशेषज्ञ इस पर और रिसर्च कर रहे हैं, ताकि कोरोना वायरस के म्यूटेशन के बारे में और जानकारी मिल सके। रिसर्च में सबसे ज्यादा फोकस कोरोना के उस स्पाइक प्रोटीन पर किया जा रहा है, जो इंसानी कोशिकाओं में संक्रमण की वजह बनता है। यही सबसे अहम है। अगर वैक्सीन वायरस की इसी खूबी को ब्लॉक करने में कामयाब हो जाती है तो वह बेहद असरदार साबित होगी।